ऑनलाइन ठगी में माहिर शातिरों द्वारा सिम क्लोनिंग व कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए धर्मशाला निवासी एक महिला का मोबाइल हैक कर 6 लाख 45 हजार रुपए की राशि उड़ा ली है। महिला के दो बैंक अकाऊंट्स से राशि उड़ने पर महिला ने बैंक स्टाफ पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जानकारी के अनुसार ठगी की शुरूआत पी.एम. आवास योजना से जुड़े एक फर्जी लिंक के जरिए हुई। शिकायतकर्त्ता निशा सूद पत्नी उमेश सूद ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, उनके मोबाइल का नैटवर्क पूरी तरह गायब हो गया। असल में यह शातिरों द्वारा सिम क्लोन करने की प्रक्रिया थी, जिससे पीड़िता का सिम निष्क्रिय हो गया और उनके नंबर का एक्सैस अपराधियों के पास चला गया।
शातिर ठगों ने महिला के मोबाइल नंबर पर आने वाली सभी कॉल्स को एक अनजान नंबर पर फॉरवर्ड कर दिया। इससे बैंक से आने वाले ट्रांजैक्शन अलर्ट और ओ.टी.पी. पीड़िता को मिलने के बजाय सीधे ठगों के पास पहुंचने लगे। इस दौरान शातिरों ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते से 2,40,000 रुपए उड़ाए। एक निजी बैंक अकाऊंट से 4,04,996 रुपए की अवैध निकासी की। जब तक पीड़िता को नैटवर्क गायब होने और सिम के साथ हुई छेड़छाड़ का अहसास होता, तब तक उनके खातों से कुल 6,44,996 रुपए निकाले जा चुके थे।
अशोक रत्न, एस. पी. जिला कांगड़ा का कहना है कि साइबर अपराधी सिम क्लोनिंग और कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए एक बड़ी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों से बहुत अधिक अलर्ट रहने की आवश्यकता है। पुलिस ने एफ.आई.आर. दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पुलिस को सौंपे 21 पन्नों के सबूत
पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत के साथ 21 पन्नों के सबूत भी पुलिस को सौंपे हैं। शिकायत में बैंक की कोतवाली बाजार शाखा के एक कर्मचारी पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल साइबर हैल्पलाइन 1930 और एस.एस.पी. साइबर सैल की मदद से संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया गया है।
Reviewed by SBR
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February 06, 2026
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