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सावधान! सिर्फ एक 'Link' पर क्लिक और फिर बैंक खाता हुआ खाली: धर्मशाला में महिला से हुई लाखों की ठगी

February 06, 2026


 ऑनलाइन ठगी में माहिर शातिरों द्वारा सिम क्लोनिंग व कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए धर्मशाला निवासी एक महिला का मोबाइल हैक कर 6 लाख 45 हजार रुपए की राशि उड़ा ली है। महिला के दो बैंक अकाऊंट्स से राशि उड़ने पर महिला ने बैंक स्टाफ पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं।


पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जानकारी के अनुसार ठगी की शुरूआत पी.एम. आवास योजना से जुड़े एक फर्जी लिंक के जरिए हुई। शिकायतकर्त्ता निशा सूद पत्नी उमेश सूद ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, उनके मोबाइल का नैटवर्क पूरी तरह गायब हो गया। असल में यह शातिरों द्वारा सिम क्लोन करने की प्रक्रिया थी, जिससे पीड़िता का सिम निष्क्रिय हो गया और उनके नंबर का एक्सैस अपराधियों के पास चला गया।


शातिर ठगों ने महिला के मोबाइल नंबर पर आने वाली सभी कॉल्स को एक अनजान नंबर पर फॉरवर्ड कर दिया। इससे बैंक से आने वाले ट्रांजैक्शन अलर्ट और ओ.टी.पी. पीड़िता को मिलने के बजाय सीधे ठगों के पास पहुंचने लगे। इस दौरान शातिरों ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते से 2,40,000 रुपए उड़ाए। एक निजी बैंक अकाऊंट से 4,04,996 रुपए की अवैध निकासी की। जब तक पीड़िता को नैटवर्क गायब होने और सिम के साथ हुई छेड़छाड़ का अहसास होता, तब तक उनके खातों से कुल 6,44,996 रुपए निकाले जा चुके थे।


अशोक रत्न, एस. पी. जिला कांगड़ा का कहना है कि साइबर अपराधी सिम क्लोनिंग और कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए एक बड़ी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों से बहुत अधिक अलर्ट रहने की आवश्यकता है। पुलिस ने एफ.आई.आर. दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

पुलिस को सौंपे 21 पन्नों के सबूत


पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत के साथ 21 पन्नों के सबूत भी पुलिस को सौंपे हैं। शिकायत में बैंक की कोतवाली बाजार शाखा के एक कर्मचारी पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल साइबर हैल्पलाइन 1930 और एस.एस.पी. साइबर सैल की मदद से संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया गया है।

सावधान! सिर्फ एक 'Link' पर क्लिक और फिर बैंक खाता हुआ खाली: धर्मशाला में महिला से हुई लाखों की ठगी सावधान! सिर्फ एक 'Link' पर क्लिक और फिर बैंक खाता हुआ खाली: धर्मशाला में महिला से हुई लाखों की ठगी Reviewed by SBR on February 06, 2026 Rating: 5

बर्फबारी ने छीना जेईई मेन्स का मौका, अभ्यर्थियों की एनटीए से दोबारा एग्जाम करवाने की मांग

January 25, 2026

 

प्रदेश में भारी बर्फबारी और खराब मौसम ने जेईई मेन्स परीक्षा देने जा रहे कई होनहार छात्रों के सपनों पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया। दुर्गम इलाकों में सडक़ें बंद होने और परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण कई छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी निराशा है। जेईई मेन्स परीक्षा का आयोजन 21, 22, 23, 24 और 28 जनवरी को किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार दोपहर तीन से छह बजे तक आयोजित परीक्षा में प्रदेश के कई छात्र शामिल नहीं हो सके। बर्फबारी के कारण बच्चों को शिमला से निकलना मुश्किल हो गया। बच्चों का घणाहट्टी स्थित संस्कृत कॉलेज में दूसरी शिफ्ट में जेईई परीक्षा थी, लेकिन बर्फबारी और रोड बंद होने के कारण छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके।



जेईई मेन्स की परीक्षा देने आए छात्र प्रियांशु नेगी (किन्नौर), सुजल नेगी (किन्नौर), प्रत्यूश ठाकुर (मंडी), स्नेहा मिश्रा (शिमला) का कहना है कि उन्होंने महीनों की कड़ी मेहनत से जेईई की तैयारी की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा जैसे हालातों के कारण वे परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। कई छात्रों ने सुबह ही घर से निकलने की कोशिश की, लेकिन बर्फ और फिसलन के कारण रास्ते में ही लौटना पड़ा। वहीं, बसें और टैक्सियां भी बर्फबारी के चलते नहीं चल सकीं। छात्रों का कहना है कि जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में एक मौका पूरे करियर की दिशा तय करता है। प्राकृतिक आपदा के कारण परीक्षा से वंचित होना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। इन छात्रों ने उम्मीद जताई है कि एनटीए मानवीय और न्यायसंगत फैसला लेगी।


री-एग्जाम की बनाएं पॉलिसी


छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी। पहाड़ी राज्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा आयोजक एजेंसी को विशेष व्यवस्था या वैकल्पिक तिथि की घोषणा करनी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि बर्फबारी से प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा करवाई जाए। छात्रों का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में जनवरी महीने में बर्फबारी आम है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, मौसम प्रभावित छात्रों के लिए री-एग्जाम पॉलिसी बनाई जाए और विशेष परिस्थितियों में राहत प्रावधान लागू किए जाएं।

बर्फबारी ने छीना जेईई मेन्स का मौका, अभ्यर्थियों की एनटीए से दोबारा एग्जाम करवाने की मांग बर्फबारी ने छीना जेईई मेन्स का मौका, अभ्यर्थियों की एनटीए से दोबारा एग्जाम करवाने की मांग Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण

January 25, 2026

 


मंडी जिला में हर दिन जलते चूल्हे पर बनती दो जून की रोटी में चार हजार क्विंटल सरकारी नमक ही खप गया है। बीते दो महीनों के भीतर ही मंडी में 85 हजार क्विंटल आटा चट हो गया है। उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित हुए सरकारी राशन के आंकड़े तो यही बताते हैं कि इस समय अवधि के तहत पौने दस लाख लीटर तेल लोग हजम कर गए हैं। खाद्य विभाग के आंकड़े यह बता रहे हैं कि इस राशन का वितरण मंडी जिला में नबंवर और दिसंबर माह में किया गया है। मंडी जिला में कुल राशन कार्डधारक सवा तीन लोगों को यह राशन मुहैया करवाया गया है। उचित मूल्य दुकानों द्वारा 323950 राशन कार्ड धारकों को आटा, चावल, दालें, चीनी, तेल एवं नमक का वितरण किया जा रहा है।


यह वितरण एपीएलए बीपीएलए अंत्योदय अन्न योजना तथा प्राथमिक गृहस्थियां योजना के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवम्बर 2025 तथा दिसंबर 2025 के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कुल 84990 क्विंटल आटा, 54493 क्विंटल चावल, 10915 क्विंटल दालें, 8162 क्विंटल चीनी, 981639 लीटर खाद्य तेल तथा 4018.41 क्विंटल नमक वितरित किया गया। जिला मंडी में खाद्य आपूर्ति निगम के 19 गोदामों के माध्यम से 855 उचित मूल्य की दुकानों से सरकारी राशन का वितरण होता है। इस दौरान आटा, चावल, दालें, चीनी, तेल एवं नमक का वितरण किया जा रहा है। उचित मूल्य दुकानों द्वारा 323950 राशन कार्ड धारकों को राशन वितरित किया जा रहा है।


निरीक्षण में पाई अनियमितताएं, वसूला जुर्माना

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा नवम्बर 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान विभिन्न नियंत्रण आदेशों के तहत कुल 1039 निरीक्षण किए गए। निरीक्षणों के दौरान पाई गई अनियमितताओं पर इस अवधि में कुल 10400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। उन्होंने खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण एवं नमूने लेने के निर्देश भी दिए।


मंडी में राशन वितरण को खुलेंगी नई दुकानें

मंडी डीसी अर्पूव देवगन ने बताया कि राशन का वितरण सही से हो और उचित मुल्य की दुकानों पर लोगों को ज्यादा इंतजार ना करना पड़े इसके लिए कुछ नई दुकाने खोली जाएंगी।

मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

बर्फबारी से राजधानी पर्यटकों से हुई गुलजार

January 25, 2026

 


जिला में पर्यटक बढऩे से कारोबारियों के खिले चेहरे, पर्यटकों ने कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर टॉय ट्रेन से निहारी वादियां


बर्फबारी के बाद अब अन्य राज्यों से पर्यटकों ने शिमला का रुख करना शुरू कर दिया है। बर्फबारी के बाद अब पर्यटकों में शिमला पहुंचने की होड़ सी लग गई है। शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद शनिवार को शिमला के एंट्री प्वाइंट पर पर्यटक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। इस वीकेंड पर तीन छुट्टियों का पैकेज है। जिसमें भारी संख्या में पर्यटक शिमला का रुख कर रहे हैं। पर्यटक कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक से टॉय ट्रेन में सफर कर शिमला पहुंच रहे हैं। शनिवार को ट्रेन के शिमला पहुंचते ही पर्यटक हर तरफ बर्फ देखकर उत्साहित हो उठे। जिसका वीडियो खूब वायरल हो रही है। सैलानी ट्रेन से उतरते ही बर्फ में मस्ती करने लगे।


बर्फबारी के बाद इस वीकेंड शिमला एक बार फिर पर्यटकों से पैक हो गई है। चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में सैलानी शिमला पहुंच रहे हैं। शनिवार को पर्यटक रिज, माल रोड और अन्य पर्यटक स्थलों पर मौज-मस्ती करते नजर आए। दिन के समय रिज पर जमी बर्फ में पर्यटक खेलते और फोटो खीचवाते नजर आए। पर्यटकों की भारी संख्या में पहुंचने से पर्यटन कारोबारी के चेहरे खिल उठे है। बर्फबारी के बाद अचानक बढ़ी भीड़ से होटल बुकिंग में इजाफा हुआ है। शहर के होटलों में ऑक्यूपेंसी 60 से 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है।


होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ी

होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने बताया कि बीते दो हफ्तों से होटल पूरी तरह खाली चल रहे हैं। इस वीकेंड पर पर्यटकों के आने से होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ी है। शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद अब शिमला में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। शुक्रवार को 60 से 65 के प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रही और आने वाले दिनों में ऑक्यूपेंसी और बढऩे की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के बाद शिमला में अब आक्यूपेंसी बढऩी शुरू हो गई है। वहीं दूसरी ओर से एडवांस बुकिंग में भी अचानक उछाल आया है।

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Full Statehood Day : परागपुर से आज सौगातें देंगे CM, महिलाओं को 1500, कर्मचारियों को DA की आस

January 25, 2026


 मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कांगड़ा जिला के परागपुर से पूर्ण राज्यत्व दिवस के राज्यस्तरीय समारोह को संबोधित करेंगे। वह इस अवसर का इस्तेमाल नई घोषणा को लेकर भी कर सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री मनाली और सुलाह विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान पहली अप्रैल से महिलाओं को 1500 रुपए देने की घोषणा कर चुके हैं। यह घोषणा पूरे प्रदेश के लिए एक साथ कब होगी? इसका इंतजार अभी महिलाओं को है। दूसरी तरफ राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अपने महंगाई भत्ते और पिछले वेतन आयोग के एरियर का फिक्र है। मुख्यमंत्री इसके बाद विधानसभा के बजट सत्र में जा रहे हैं। इसलिए नए बजट से पहले क्या कोई बड़ी घोषणा पूर्ण राज्यत्व दिवस के मंच से हो सकती है? इसका इंतजार सबको है। स्टेट हुड डे के इस कार्यक्रम के लिए खराब मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री शिमला से बाई रोड रवाना हो गए हैं।


रात को नादौन में रुकने के बाद सुबह वह परागपुर में होंगे और इसके बाद शिमला लौट आएंगे, क्योंकि गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह ऐतिहासिक रिज मैदान पर है। कांगड़ा के लिए शिमला से रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण राज्यत्व दिवस हिमाचल प्रदेश की गौरवशाली यात्रा, ऐतिहासिक संघर्षों और जन एकजुटता का जीवंत प्रतीक है। यह दिवस हमें अपने स्वर्णिम अतीत से प्रेरणा लेने तथा प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए नए संकल्प अपनाने का अवसर प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दूरदर्शी नेतृत्व का सम्मान व्यक्त करते हुए ‘हिमाचल के शिल्पकार’ डॉ. वाईएस परमार सहित उन सभी महान विभूतियों को याद किया, जिनकी दूरदृष्टि, त्याग और अथक प्रयासों से प्रदेश ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे ‘हरित एवं समृद्ध हिमाचल’ के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और राष्ट्र निर्माण में सशक्त योगदान देगा।


मुख्यमंत्री ने किया याद इंदिरा गांधी का योगदान

मुख्यमंत्री ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अविस्मरणीय योगदान को भी स्मरण करते हुए कहा कि 25 जनवरी, 1971 को शिमला के ऐतिहासिक रिज पर भारी हिमपात के बीच हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की घोषणा प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। प्रदेश के भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य करते हुए प्रदेश की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पूर्णत: आत्मनिर्भर राज्य बनाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में ठोस एवं परिणामोन्मुखी कदम उठाए जा रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामले, केंद्र ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन

January 25, 2026

 


पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामलों की पहचान के बाद केंद्र सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए त्वरित और व्यापक कदम उठाए हैं। 11 जनवरी 2026 को कल्याणी स्थित आईसीएमआर के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (वीआरडीएल), एम्स कल्याणी में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई है। निपाह वायरस एक गंभीर ज़ूनोटिक बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर अधिक होती है और इसके तेज़ी से फैलने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए हालात को सर्वोच्च प्राथमिकता पर संभाला जा रहा है।


मामले सामने आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) के साथ समीक्षा बैठक की और त्वरित तथा समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की। राज्य सरकार को सहयोग देने के लिए केंद्र की ओर से एक राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल तैनात किया गया है। इस टीम में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन, कोलकाता; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, चेन्नई; एम्स कल्याणी तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।


केंद्र सरकार ने निपाह वायरस रोग से संबंधित दिशा-निर्देश राज्य के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को साझा किए हैं। साथ ही, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र (पीएचईओसी) को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि देशभर में प्रतिक्रिया और समन्वय को प्रभावी बनाया जा सके।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से टेलीफोन पर भी बातचीत कर राज्य को तकनीकी, लॉजिस्टिक और संचालन स्तर पर हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।


केंद्र सरकार की ओर से प्रयोगशाला सहायता, निगरानी को सुदृढ़ करने, रोगियों के उपचार, संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों तथा विशेषज्ञ मार्गदर्शन सहित सभी आवश्यक संसाधन पहले ही जुटा दिए गए हैं। राज्य सरकार को तैनात विशेषज्ञ टीमों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने, संदिग्ध संपर्कों की गहन पहचान और अन्य रोकथाम उपायों को सख्ती से लागू करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में रहकर स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है।

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एक खुले बजट की ओर

January 25, 2026

 


बजट की गोपनीयता की रस्म, जो औपनिवेशिक काल के रहस्य में लिपटी हुई है और बदनाम ‘बजट बंकर’ द्वारा दर्शाई गई नाटकीय सख्ती के साथ लागू की जाती है, 21वीं सदी के लोकतंत्र में एक पुरानी बात लगती है, जो पारदॢशता और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था के लिए कोशिश कर...


बजट की गोपनीयता की रस्म, जो औपनिवेशिक काल के रहस्य में लिपटी हुई है और बदनाम ‘बजट बंकर’ द्वारा दर्शाई गई नाटकीय सख्ती के साथ लागू की जाती है, 21वीं सदी के लोकतंत्र में एक पुरानी बात लगती है, जो पारदॢशता और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था के लिए कोशिश कर रहा है। यह परंपरा, जिसमें केंद्रीय बजट संसद में तय दिन पर ही खोला जाता है, समझदारी भरे आॢथक प्रबंधन का स्तंभ कम और पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता का अवशेष ज्यादा है।


इस अवधारणा के जनक रॉबर्ट वालपोल थे, जो ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री थे (और अपने प्रधानमंत्रित्व काल में चांसलर ऑफ एक्सचेकर भी थे)। 1733 में, वालपोल के विरोधियों ने उनके टैक्स प्रस्तावों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें जादूगर की चाल बताया और ‘द बजट ओपन्ड’ शीर्षक से एक पैम्फलेट प्रकाशित किया, जिसमें वित्तीय योजना को ‘चालों की थैली’ से प्रकट किया गया एक ‘महान रहस्य’ बताया गया था। वालपोल और तब से हर चांसलर ने अपने वित्तीय प्रस्तावों की गोपनीयता का इस्तेमाल सट्टेबाजी वाले बाजार के हितों की रक्षा करने की बजाय संसदीय विरोधियों को मात देने और जनता के गुस्से को कम करने के लिए किया। इस प्रथा को ब्रिटिश भारत में लाया गया और तेज किया गया, जहां बजट लोकतांत्रिक बातचीत का नहीं, बल्कि शाही शोषण का एक उपकरण था। आज के नॉर्थ ब्लॉक का बजट बंकर औपनिवेशिक किलेबंदी वाली मानसिकता का सीधा वंशज है।


इस गोपनीयता के क्लासिक तर्क आधुनिक संदर्भ में कमजोर हैं। रियल-टाइम डाटा एनालिटिक्स, एल्गोरिदमिक ट्रेङ्क्षडग और वैश्विक पूंजी प्रवाह के युग में, यह धारणा कि कुछ हफ्तों की गुप्त तैयारी बाजारों को प्रभावी ढंग से ‘हैरान’ कर सकती है, भोली है। इसकी बजाय, जटिल वित्तीय और टैक्स उपायों की अचानक, बड़े पैमाने पर घोषणा अक्सर अस्थिरता पैदा करती है क्योंकि बाजार बिना किसी विश्लेषक की पहले की जांच या चरणबद्ध बहस के सैंकड़ों पन्नों की घनी नीति को समझने की कोशिश करते हैं। यह जिस असली सट्टेबाजी को बढ़ावा देता है, वह राजनीतिक किस्म की होती है-उन्मादी मीडिया अटकलें और लॉबिस्टों की फुसफुसाहट वाली मुहिम, जो सूचना के अभाव में पनपती है। इसके अलावा, यह दावा कि गोपनीयता अनुचित लाभ को रोकती है, खोखला है, जब हम यह सोचते हैं कि परिष्कृत कॉर्पोरेट संस्थाओं के पास आम नागरिक या छोटे व्यवसाय की तुलना में तत्काल बजट घोषणा का विश्लेषण करने और उस पर प्रतिक्रिया करने के लिए हमेशा अधिक संसाधन होते हैं। 


स्वीडन, नीदरलैंड्स और जर्मनी जैसे देश ओपन बजट बनाने के सिद्धांतों पर काम करते हैं। मुख्य पैरामीटर - वित्तीय सीमाएं, प्रमुख नीति दिशा, राजस्व पूर्वानुमान महीनों पहले प्रकाशित किए जाते हैं और उन पर बहस होती है। फ्रांस भी एक पारिभाषित मल्टी-ईयर वित्तीय ढांचे के भीतर बजट पर एक व्यापक सार्वजनिक और संसदीय चर्चा करता है। विधायिका सालाना तमाशे के लिए एक निष्क्रिय दर्शक बनने की बजाय शासन में एक भागीदार बन जाती है। ऐसी पारदॢशता का सीधा संबंध उच्च क्रैडिट रेटिंग, कम उधार लागत और अधिक वित्तीय स्थिरता से है - ऐसे परिणाम, जिनकी भारत को सख्त जरूरत है।


भारत के लिए ऐसे मॉडल की ओर बढऩे के फायदे बहुत ज्यादा हैं। सबसे पहले, यह कार्यपालिका पर एक मजबूत अनुशासन लागू करता है। दूसरा, यह ठोस पॉलिसी में तालमेल को बढ़ावा देता है। जब बड़ी पहल, चाहे वह कोई नई वैल्फेयर स्कीम हो या डिफैंस मॉडर्नाइजेशन प्लान, बजट से पहले के बयान में बताई जाती हैं, तो संसदीय समितियां हितधारकों से चर्चा कर, उनकी व्यवहार्यता का आकलन और लंबे समय के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ तालमेल का मूल्यांकन कर सकती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह राजनीतिक रूप से तय किए गए आॢथक पैकेजों के लगातार विवाद को खत्म कर देगा। अगर इन आबंटनों पर खुले बजट फ्रेमवर्क के हिस्से के रूप में चर्चा की जाती है, तो उनका जरूरत, प्रदर्शन और समानता के वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है, जिससे उन्हें ज्यादा वैधता मिलेगी।


भारत के लिए आगे का रास्ता धीरे-धीरे, सोच-समझकर कैलिब्रेटेड खुलापन अपनाना है। यह प्रक्रिया बजट दिवस से दो-तीन महीने पहले एक अनिवार्य प्री-बजट वित्तीय रणनीति विवरण के साथ शुरू हो सकती है। साथ ही, टैक्स प्रस्तावों पर एक तकनीकी दस्तावेज एडवांस रूलिंग अथॉरिटी और विशेषज्ञों के एक चुनिंदा पैनल के साथ कड़ी गोपनीयता के तहत सांझा किया जा सकता है ताकि प्रशासनिक व्यवहार्यता की जांच की जा सके और केवल सटीक दर परिवर्तनों की घोषणा उसी दिन की जाए।  अब समय आ गया है कि हम अपनी वित्तीय योजना के केंद्र में सूचित बहस की रोशनी लाएं, क्योंकि जैसा कि जस्टिस लुई ब्रैंडिस की प्रसिद्ध पंक्तियां हैं, धूप सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है। राष्ट्र का वित्तीय स्वास्थ्य और उसके लोकतंत्र की अखंडता इससे कम कुछ भी नहीं मांगती।

एक खुले बजट की ओर एक खुले बजट की ओर Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी

January 25, 2026


 फैज अहमद फैज की यह रचना उन द्वारा लिखी ‘जेल डायरी’ से प्रेरित है। ये पंक्तियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी के बावजूद एक शायर व लेखक के हौसले को दर्शाती हैं। 1950 के दशक के बाद फैज अहमद फैज को उनके प्रगतिशील, क्रांतिकारी और वामपंथी विचारों के...


मता-ए-लौह-ओ-कलम छिन गई तो क्या गम है, 

कि खून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियां मैंने, 

जुबां पे मोहर लगी है तो क्या, 

कि रख दी है हर एक हल्का-ए-जंजीर में जुबां मैंने।


फैज अहमद फैज की यह रचना उन द्वारा लिखी ‘जेल डायरी’ से प्रेरित है। ये पंक्तियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी के बावजूद एक शायर व लेखक के हौसले को दर्शाती हैं। 1950 के दशक के बाद फैज अहमद फैज को उनके प्रगतिशील, क्रांतिकारी और वामपंथी विचारों के कारण सत्ताधारी ताकतों द्वारा बार-बार निशाना बनाया गया और उनकी लेखनी पर पाबंदी लगाई गई लेकिन वह हमेशा अपनी कलम से आवाज उठाते रहे।

शायरों, लेखकों, सम्पादकों पर हकूमतों द्वारा उनकी आवाज दबाना कोई नई बात नहीं है और जब-जब अत्याचार हुए, राज करने वाले राजाओं को बाद में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे। इतिहास इस बात का साक्षी है कि राजा खत्म हो गए, परंतु सच्चाइयां आज भी जिंदा हैं।

‘पंजाब केसरी’ समाचार पत्र समूह पर वर्तमान हकूमत द्वारा सच्चाई न सुन पाने पर जो दमनकारी नीति अपनाई गई है, ये चालें पुरानी हो चुकी हैं। आज सोशल मीडिया का जमाना है। सच्चाई सबके सामने है। शीश महल संबंधी एक खबर के प्रकाशन पर तिलमिलाहट क्यों, वह भी, जब दूसरा पक्ष भी प्रकाशित किया गया हो।

हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, 

दिल के खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है।


‘पंजाब केसरी’ के संस्थापक संपादक लाला जगत नारायण जी और रमेश चंद्र जी को आतंकवाद के खिलाफ देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देना पड़ा था। पत्रकारों की कुर्बानियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के विभिन्न प्रांतों में लिखने या बोलने पर 9 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और 33 पर हमले हुए। आवाज अब भी दबाई नहीं जा सकती।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाली प्रैस की भूमिका सिर्फ खबरें देना भर नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना और जनता की आवाज बनना भी है। लेकिन जब-जब प्रैस की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है, तब-तब यह सिर्फ पत्रकारिता पर हमला नहीं होता, बल्कि पूरे लोकतंत्र की आत्मा को चोट पहुंचती है।

राहत इंदौरी का यह शे’र भी याद रखना चाहिए-

शाखाओं से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम,

आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे।


जब पत्रकार डर के माहौल में काम करने लगते हैं, जब सच्ची खबरों पर रोक लगाई जाती है, जब सवाल पूछने वालों को धमकाया या बदनाम किया जाता है, तब समाज धीरे-धीरे अंधेरे की ओर बढऩे लगता है।

उर्दू के शायर इकबाल अशहर का यह शे’र :

यही जूनून यही एक ख्वाब मेरा है,

मैंं वहां चिराग जला दूं जहां अंधेरा है,

तेरी रजा भी तो शामिल थी मेरे बुझने में,

मैं जो जल उठा हूं तो यह कमाल भी तेरा है।

आज कई जगह यह देखने को मिल रहा है कि प्रैस पर दबाव बनाया जा रहा है-कभी विज्ञापनों के जरिए, कभी सरकारी एजैंसियों के दुरुपयोग के जरिए, कभी कानूनी शिकंजे के जरिए और कभी डर व धमकियों के माध्यम से। कुछ मामलों में तो सच लिखने की कीमत जेल, मुकद्दमे या हमलों के रूप में चुकानी पड़ रही है। यह स्थिति बेहद ङ्क्षचताजनक है, क्योंकि अगर प्रैस ही स्वतंत्र नहीं रहेगी, तो आम आदमी की आवाज कौन उठाएगा?

इस बात की नौबत न आ जाए, 

वो जो ख्वाब थे मेरे जेहन में, 

न मैं कह सका न लिख सका,

कि जुबां मिली तो कटी हुई,

कि कलम मिला तो बिका हुआ।


प्रैस की आजादी का मतलब यह नहीं कि वह निरंकुश हो जाए, बल्कि इसका मतलब यह है कि वह बिना डर और दबाव के सच दिखा सके। सत्ता की आलोचना करना, गलत नीतियों को उजागर करना और जनहित के मुद्दों को सामने लाना ही पत्रकारिता का असली धर्म है।

असली धर्म निभाया है ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप ने। दो मुख्य संपादकों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान का दूसरा शायद ही कहीं कोई उदाहरण हो। आतंकवाद के खिलाफ लिखना और उनको सरेआम सरे बाजार दिन दिहाड़े गोलियों से शहीद कर देना और इसके बावजूद आतंकवाद के आगे घुटने न टेकना पत्रकारिता का सच्चा धर्म है।


आतंकवाद के खिलाफ न लिखकर भी वे अपनी जान बचा सकते थे, परन्तु उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानदंडों के साथ समझौता नहीं किया, कलम उसकी किसी दरबार की जागीर नहीं, किसी के आगे झुकना हमारी तासीर (मूल स्वभाव) नहीं। ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप ने पत्रकारिता के अतिरिक्त जो समाज सेवा का बीड़ा उठाया है, वह भी अपने आप में मिसाल है। कहा जाता है कि पत्रकार पीड़ित मानवता का वकील होता है, जो अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज सरकार के कानों तक बुलंद करता है।


‘पंजाब केसरी’ के संचालकों द्वारा चलाया जा रहा ‘शहीद परिवार फंड’ अपने आप में एक वल्र्ड रिकार्ड है, क्योंकि इतने लंबे समय तक शायद समाचार पत्र के माध्यम से कोई भी सेवा प्रोजैक्ट नहीं चलाया गया। इसके अतिरिक्त देश के किसी भी प्रांत में आई प्राकृतिक आपदाओं में रिलीफ फंड चलाना, प्रधान संपादक पद्मश्री विजय कुमार चोपड़ा द्वारा इस क्षेत्र के विभिन्न नगरों में जाकर सेवा प्रोजैक्टों में भाग लेना व लोगों को प्रेरित करना अपने आप में  एक अनूठा उदाहरण है।

वैल्फेयर प्रोजैक्टों के बावजूद यदि वर्तमान हकूमत द्वारा ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप पर दमनकारी नीति अपनाई जा रही है तो फिर इसका जवाब अवाम पर ही छोड़ देना चाहिए।

‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी ‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

सोलन में 37 पशु मित्रों की भर्ती शुरू

January 16, 2026


 सोलन जिले में पशुपालन विभाग ने स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पशु मित्रों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत जिले में कुल 37 पशु मित्रों के पद भरे जाएंगे। विभाग के अनुसार यह भर्ती अंशकालिक आधार पर की जाएगी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिदिन चार से पांच घंटे कार्य करना होगा। इसके बदले सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा। पशुपालन विभाग ने जानकारी दी है कि आवेदन प्रक्रिया 12 जनवरी से शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। भरे हुए आवेदन पत्र कंडाघाट, धर्मपुर और नालागढ़ स्थित पशुपालन विभाग के कार्यालयों में जमा करवाए जा सकते हैं। भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास निर्धारित की गई है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया में उसी पंचायत के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां संबंधित पद सृजित किया गया है।


यह भर्ती सभी वर्गों के लिए खुली है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। चयन प्रक्रिया के तहत पात्र अभ्यर्थियों को फरवरी माह में शारीरिक परीक्षण के लिए बुलाया जाएगा। इस परीक्षण में अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन उठाकर 100 मीटर की दूरी एक मिनट के भीतर पूरी करनी होगी। इस शारीरिक परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों की योग्यता का आकलन किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पशु मित्र इंगेजमेंट कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित उपमंडल अधिकारी करेंगे। कमेटी में पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। उप निदेशक पशुपालन विभाग सोलन विवेक लाम्बा ने बताया कि चयन के बाद कमेटी अपनी सिफारिश उच्च विभाग को भेजेगी, जिसके आधार पर अंतिम नियुक्ति की जाएगी।


बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

नाहन। जिला रोजगार अधिकारी देविन्द्र कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मैसर्ज ऑरो स्पिनिंग मिल्स बद्दी, जिला सोलन द्वारा हेल्पर और मशीन ऑपरेटर के 200 पद रोजगार कार्यालय के माध्यम से भरे जा रहे है। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 19 जनवर, 2026 को उप रोजगार कार्यालय संगडाह व 20 जनवरी को उप रोजगार कार्यालय सराहां में प्रात: 11 बजे से आयोजित किए जाएगें। इन पदों के लिए आयु 18 वर्ष से 30 वर्ष तथा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 5वीं से 12वीं रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी आवश्यक दस्तावेज जिसमें, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, स्थाई हिमाचली प्रमाणपत्र तथा 2 पासपोर्ट साइज फोटो सहित निर्धारित तिथियों में उपरोजगार कार्यालयों में कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते है।

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ट्रम्प किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहे हैं

January 16, 2026

 


अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और...


अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क में ‘नार्को-आतंकवाद’ के आरोपों में मुकद्दमे का सामना करने के लिए गिरफ्तार करना एक ‘शानदार हमला’ था। उन्होंने घोषणा की कि अमरीका देश का ‘शासन’ चलाएगा और इसके तेल भंडार का उपयोग उन अमरीकी कंपनियों को मुआवजा देने के लिए करेगा, जिनके निगमों का लगभग दो दशक पहले राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।


क्या वेनेजुएला में अमरीकी सैन्य कार्रवाई वास्तव में नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए थी? सन 2000 से, मादक पदार्थों की ओवरडोज से लगभग सवा दस लाख अमरीकी नागरिकों की मौत हो चुकी है। लेकिन, इनमें से लगभग 69 प्रतिशत मौतें फेंटानिल के कारण हुईं, जिसके पूर्ववर्ती रसायन चीन में उत्पादित होते हैं। वेनेजुएला अमरीका में कोकीन का एक मामूली स्रोत है। हालांकि, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। ट्रम्प की इस घोषणा के बाद कि अमरीकी तेल कंपनियां, जो ‘दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां’ हैं, अब दक्षिण अमरीकी देश में प्रवेश करेंगी, उनके इरादों की और पुष्टि की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।


अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन : वेनेजुएला में अमरीका की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का सबसे घोर उल्लंघन है। इस बात पर जोर देने की शायद ही जरूरत है कि इस कार्रवाई ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन किया है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी या आत्मरक्षा (अनुच्छेद 51) के अलावा किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के खतरे या उपयोग को प्रतिबंधित करता है। यह घटना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन के बिगडऩे का संकेत देती है। मूल रूप से कई देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए यूरोप द्वारा निर्मित इस व्यवस्था में 20वीं शताब्दी में आमूल-चूल परिवर्तन हुए। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, इसने अमरीका और सोवियत संघ को मुख्य भूमिका में रखते हुए एक द्विध्रुवीय संरचना को जन्म दिया। इस दौरान, कोई भी देश बेरोकटोक शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर सका। एक देश दूसरे को संतुलित करता रहा, जिससे एक नाजुक शांति बनी रही।


सत्ता का संतुलन : वेनेजुएला पर हमले से दिसम्बर, 1971 में बंगलादेश युद्ध के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सत्ता के समीकरणों की याद आती है। इसने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के भारत-विरोधी प्रशासन की साजिशों को नाकाम कर दिया। जब वाशिंगटन ने नई दिल्ली को डराने और आत्मसमर्पण कराने के लिए अमरीकी सातवें बेड़े की टास्क फोर्स टी.एफ.-74 को तैनात किया, तो सोवियत संघ ने क्रूजर, विध्वंसक और पनडुब्बियों की जवाबी तैनाती करके खतरे को बेअसर कर दिया। यह शक्ति संतुलन की अवधारणा के एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में एक महाशक्ति द्वारा दूसरी महाशक्ति का प्रतिकार था। इसी तरह, जब 1973 के योम किप्पुर युद्ध में मिस्र की तीसरी सेना पर इसराईल के हाथों विनाश का खतरा मंडराया, तो सोवियत नेता लियोनिद ब्रेझनेव ने हवाई डिवीजनों को तैयार क्षेत्रों में तैनात किया, क्योंकि मिस्र मास्को का करीबी सहयोगी था। चिंतित अमरीका ने डेफकोन-3 (अमरीकी रक्षा तत्परता/खतरे का अलर्ट) घोषित किया। इसराईल ने आत्मसमर्पण कर दिया और सोवियत चेतावनी ने मिस्र की सेना को बचा लिया।


हालांकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ, दुनिया ने अमरीका द्वारा सत्ता के अनियंत्रित दुरुपयोग को चुनौती देने में सक्षम एकमात्र शक्ति खो दी। इससे उत्साहित होकर, वाशिंगटन ने पूर्वनिवारक (प्री-एम्पटिव) युद्ध में शामिल होने का अधिकार प्राप्त कर लिया है। इसने प्रत्यक्ष कार्रवाई या समॢथत आंदोलनों के माध्यम से ईराक, मिस्र, लीबिया और सीरिया में सरकारों को उखाड़ फैंका है। निकट भविष्य में, केवल चीन ही अमरीका के प्रतिसंतुलन के रूप में उभर सकता है। रूस और चीन के बीच एक ढीला गठबंधन मौजूदा एकध्रुवीय संरचना को चुनौती दे सकता है, हालांकि प्रमुख शक्तियों के बीच मतभेद एक स्थायी सांझेदारी को रोक सकते हैं। अमरीका ने एक बार फिर भारत के सुरक्षा हितों के प्रति अपनी असंवेदनशीलता साबित कर दी है, ऐसे में नई दिल्ली को एक प्रतिसंतुलनकारी शक्ति बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। उसे अपने सैन्य-औद्योगिक परिसर के निर्माण और रक्षा को मजबूत करने के लिए एक कल्पनाशील और लीक से हटकर रणनीति विकसित करनी होगी।-थॉमस मैथ्यू

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घरेलू महिलाएं : खुद न करें अपनी खुशी की हत्या!

January 13, 2026

 


आज का समय फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का है। हर व्यक्ति बोल रहा है, लिख रहा है, दिख रहा है। प्रतिभा को मंच मिल रहा है, अभिव्यक्ति को विस्तार मिल रहा है। लेकिन इसी शोर के बीच एक तबका ऐसा है, जो आज भी चुप है-या यूं कहें कि चुप करा दिया गया...


आज का समय फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का है। हर व्यक्ति बोल रहा है, लिख रहा है, दिख रहा है। प्रतिभा को मंच मिल रहा है, अभिव्यक्ति को विस्तार मिल रहा है। लेकिन इसी शोर के बीच एक तबका ऐसा है, जो आज भी चुप है-या यूं कहें कि चुप करा दिया गया है।

मैं उन स्त्रियों की बात कर रही हूं, जिनका पूरा जीवन केवल नर्म, गोल और गर्मा-गर्म रोटियां बनाते-बनाते ठंडा पड़ गया। 40 साल पहले हालात अलग थे, तब विकल्प नहीं थे। लेकिन आज भी वही जीवन जीना, वही तर्क देना, यह मजबूरी नहीं, आदत बन चुकी है। स्पष्ट कर दूं-रोटी बनाना कोई अपराध नहीं, अपराध यह है कि आप खुद को केवल रोटी बनाने की मशीन में बदल दें। ‘रोटी बनाना’ और ‘रोटी भी बनाना’, इन दोनों में वही अंतर है जो जिंदा रहने और जीने में होता है।


कटु सत्य यह है कि रोटी को एकदम गोल बनाने की जिद में आपने अपने व्यक्तित्व की सारी धार कुंद कर दी। दूसरों की थाली गर्म रखने में आप खुद ठंडी पड़ गईं और यह कोई त्याग नहीं, यह आत्म-उपेक्षा है। आप सबको उतनी ही गर्म रोटी खिलाइए, जितनी आप स्वयं भी उनके साथ बैठकर खा सकें। वरना याद रखिए, जो औरत खुद नहीं खाती, उसे कोई खिलाने नहीं आता। आपने अपनी पूरी ऊर्जा फर्श चमकाने, रसोई संभालने और चूल्हे में झोंक दी। अब जब खुद को पीछे छूटा पाती हैं, तो अपनी कुंठा नई पीढ़ी, कामकाजी महिलाओं या बहुओं पर थोप देती हैं। यह असंतोष का समाधान नहीं, सिर्फ उसका बदसूरत रूप है। अब दूसरों से जलना बंद कीजिए। सच तो यह है कि जलन उनकी नहीं, अपनी अधूरी संभावनाओं की है। ठहरिए और खुद से पूछिए-


क्या मैं आज वही हूं, जो मैं हो सकती थी?

अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो दोष दुनिया को नहीं, अपनी प्राथमिकताओं को दीजिए। जिन कारणों ने आपको रोका, उन्हें रोने की सूची से हटाकर जीवन की ‘बी-लिस्ट’ में डाल दीजिए।

कड़वा सच यह है कि दुनिया आपको आपके त्याग से नहीं, आपकी उपलब्धियों से पहचानती है। आपने कितना सहा, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। यहां तक कि परिवार को भी नहीं। बच्चे बड़े होते ही व्यस्त हो जाते हैं और पति की व्यस्तता तो वर्षों पुराना बहाना है।अक्सर देखा जाता है कि रोटी ठंडी हो रही हो और आप आवाज दें, तो जवाब मिलता है-‘आपको तो खाने की ही पड़ी है।’ सोचिए, जिस खाने के लिए आपने अपने सपने फ्रीजर में रख दिए, उसकी कीमत किसी की नजर में क्या है।

इसलिए अब वक्त है कि ‘रोटी ही बनाना’ को ‘रोटी भी बनाना’ में बदला जाए।


जीवन कोई गैस सिलैंडर नहीं है, जो जब चाहे बदल लिया जाए। जो करना है, अभी कीजिए। क्योंकि भविष्य में न आपका बेटा अपनी पत्नी को सिर्फ रोटी बनाने देगा और न आपकी बेटी खुद को चूल्हे तक सीमित करेगी। तब उन्हें कोसने से अच्छा है कि आज खुद को बदला जाए।

खाना बनाइए, घर संभालिए लेकिन इसके बाद खुद को भी समय दीजिए। कुछ रचिए, कुछ सीखिए। जब आप खुद को गंभीरता से लेंगी, तब परिवार भी आपको हल्के में लेना बंद कर देगा। और हां! जिस दिन आप रसोई के समय सबके पीछे भागना बंद करेंगी, उसी दिन सब समय पर खाने आने लगेंगे। सम्मान मांगना नहीं पड़ता, सीमाएं तय करनी पड़ती हैं। यह लेख घर-परिवार छोडऩे की वकालत नहीं करता। यह सिर्फ इतना कहता है कि घर बचाने के चक्कर में खुद को मत खोइए। किसी भूली हुई हॉबी को फिर से उठाइए-लिखिए, पढि़ए, सीखिए, कमाइए या बस खुद के लिए जिएं। शुरुआत में तालियां नहीं मिलेंगी लेकिन याद रखिए, जो औरत खुद के लिए खड़ी हो जाती है, उसे गिराना आसान नहीं होता।और अंत में-

जीवन जीना कोई मजबूरी नहीं, 

यह एक कला है, एक तैयारी है।

खुद को खुश रखना कोई स्वार्थ नहीं,

यह आपकी सबसे पहली जिम्मेदारी है।-प्रज्ञा पांडेय ‘मनु’

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पंजाब में गैंगस्टरों का उदय

January 13, 2026

 


2026 के सिर्फ पहले हफ्ते में, पंजाब में लगातार 4 टारगेटेड किङ्क्षलग हुईं, जो राज्य में मुश्किल ङ्क्षहसा के जमे हुए पैटर्न के लगातार बने रहने और बढऩे तथा कानून-व्यवस्था में गंभीर कमियों को दिखाती हैं। हमलावरों का साफ तौर पर बेखौफ होना, खालिस्तान...


2026 के सिर्फ पहले हफ्ते में, पंजाब में लगातार 4 टारगेटेड किङ्क्षलग हुईं, जो राज्य में मुश्किल ङ्क्षहसा के जमे हुए पैटर्न के लगातार बने रहने और बढऩे तथा कानून-व्यवस्था में गंभीर कमियों को दिखाती हैं। हमलावरों का साफ तौर पर बेखौफ होना, खालिस्तान समर्थक चरमपंथी तत्वों, नारकोटिक्स की तस्करी और स्थानीय राजनीतिक दुश्मनी से जुड़े ट्रांसनैशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और गैंगस्टर नैटवर्क की बढ़ती हिम्मत को दिखाता है।


5 जनवरी, 2026 को, गगनदीप सिंह, जो बाऊंसर के तौर पर काम करने वाले एक पूर्व कबड्डी खिलाड़ी थे और जगराओं की ‘आप’ विधायक सरवजीत कौर के करीबी रिश्तेदार थे, को जगराओं में मानुके गांव के बाहरी इलाके में अनाज मंडी के पास एक खेत में हथियारबंद हमलावरों ने गोली मार दी। शुरुआती जांच से पता चलता है कि हत्या दुश्मन ग्रुप्स के बीच झगड़े के बाद हुई। 4 जनवरी, 2026 को, ‘आप’ सरपंच जरमल सिंह को अमृतसर जिले में अमृतसर-अटारी रोड पर वेरका के पास एक रिजॉर्ट में भीड़ भरे शादी समारोह के दौरान 2 बिना मास्क वाले हथियारबंद हमलावरों ने गोली मार दी। उनको एक साल से ज्यादा समय से विदेश में रहने वाले गैंगस्टर प्रभ दासुवाल से जबरन वसूली की धमकियां मिल रही थीं। 


3 जनवरी, 2026 को, कांग्रेस पार्टी के कार्यकत्र्ता उमरसिर सिंह को मोगा जिले के ङ्क्षभडर कलां गांव में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने गोली मार दी। इससे पहले, 2 जनवरी, 2026 को, हेमप्रीत कौर, एक एन.आर.आई., जो लगभग एक महीने पहले विदेश से लौटी थी, की कपूरथला जिले में दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने टारगेटेड हमले में गोली मारकर हत्या कर दी।  


खास बात यह है कि 2016 में इस पैटर्न के फिर से शुरू होने के बाद से, 8 साल (2008-2015) के बाद, 2025 में पंजाब में टारगेटेड किलिंग की सबसे ज्यादा संख्या दर्ज की गई है, जिसमें ज्यादातर घटनाएं विदेशों में मौजूद गैंगस्टर सिंडिकेट और कट्टरपंथी खालिस्तानी तत्वों से जुड़े ट्रांसनैशनल क्राइम नैटवर्क से जुड़ी हैं। खालिस्तान एक्सट्रीमिज्म मॉनिटर (के.ई.एम.) के डाटा से पता चलता है कि पंजाब में गैंगस्टर या आतंक से जुड़ी ये मौतें हुईं-2016 में 3 (सभी आम नागरिक, टारगेटेड किलिंग), 2017 में 6 (सभी आम नागरिक, टारगेटेड किङ्क्षलग), 2018 में 3 (आतंकवादी हमले में आम नागरिक मारे गए), 2019 में 2 (एक ब्लास्ट में दो आतंकवादी मारे गए), 2020 में 2 (आम नागरिक, टारगेटेड किङ्क्षलग), 2021 में 1 (ब्लास्ट में आतंकवादी मारा गया), 2022 में 3 (आम नागरिक, टारगेटेड किलिंग), 2023 में 6 (3 आम नागरिक और 3 गैंगस्टर, सभी टारगेटेड किलिंग), 2024 में 9 (7 आम नागरिक और 2 गैंगस्टर-8 टारगेटेड किलिंग और एक इंटर-गैंग वॉर) और 2025 में तेजी से बढ़कर 31 (19 आम नागरिक, 3 आतंकवादी और 9 गैंगस्टर, जिनमें 21 टारगेटेड किलिंग) शामिल हैं। 

इनमें से ज्यादातर टारगेटेड किलिंग एक कमांड-एंड-कंट्रोल स्ट्रक्चर को दिखाती हैं, जो उत्तर भारत में लोकल और मिड-लैवल गैंग के ऑपरेटिव को अमरीका, कनाडा, यूरोप, लातिन अमरीका, मिडल ईस्ट और साऊथ-ईस्ट एशिया से ऑपरेट करने वाले विदेश में मौजूद गैंग लीडर्स के साथ-साथ पाकिस्तान की आई.एस.आई. के सपोर्ट वाले गैंगस्टर्स और आतंकवादियों से जोड़ता है। 2016-17 के दौरान, ऐसी ङ्क्षहसा में मुख्य रूप से गैर-सिख धार्मिक नेताओं और खालिस्तान विरोधी लोगों को निशाना बनाया गया ताकि सांप्रदायिक तनाव बढ़ाया जा सके और अलगाववादी भावना को फिर से जगाया जा सके। हाल के सालों में, खासकर 2022 में गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद, टारगेट प्रोफाइल में एन.आर.आई., व्यापारी और बिजनैसमैन, कबड्डी प्लेयर जैसे खिलाड़ी और पंजाबी गायक शामिल हो गए हैं, जो इन क्रिमिनल-टैरारिस्ट नैटवर्क के अंदर बड़े पैमाने पर ‘एक्सटॉर्शन रैकेट’ की बढ़ती केंद्रीयता को दिखाता है। 


31 दिसम्बर, 2025 को, पंजाब के डी.जी.पी. गौरव यादव ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर और आई.एस.आई. पर गैंगस्टरों और आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करके राज्य को अस्थिर करने की नई साजिशें रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 40 विदेशी 

गैंगस्टर पंजाब में हिंसा भड़काने की कोशिश में एक्टिव थे, जबकि 400 से ज़्यादा गैंग या मॉड्यूल अभी काम कर रहे थे, जिनकी सही संख्या अलग-अलग हो सकती है।


डी.जी.पी. ने बताया कि 2025 में पूरी कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में और ज्यादातर राज्यों के मुकाबले बेहतर थी। उन्होंने बताया कि साल के दौरान, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (ए.जी.टी.एफ.) और फील्ड यूनिट्स ने 416 गैंगस्टर मॉड्यूल खत्म किए, उनसे जुड़े 992 अपराधियों को गिरफ्तार किया, 620 हथियार और 252 गाडिय़ां जब्त कीं और केंद्रीय एजैंसियों के साथ मिलकर अनमोल बिश्नोई, परमिंदर सिंह उर्फ पिंदी, सुखदेव कुमार उर्फ मनीष बेदी, और साजन मसीह उर्फ गोरू जैसे गैंगस्टरों का प्रत्यर्पण करवाया। सिख समुदाय में खालिस्तानी चरमपंथी गैंग नैटवर्क के जरिए काम करते हैं, लड़ाकों को भर्ती करते हैं, अक्सर बेरोजगार युवा, जिनका कोई पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होता, उन्हें कैश इनाम या विदेश में बेहतर जिंदगी का वादा करके टारगेटेड किलिंग और ग्रेनेड हमलों सहित दूसरे ङ्क्षहसक कामों को अंजाम देते हैं। विपक्ष ने ‘आप’ सरकार पर कानून-व्यवस्था की नाकामी का आरोप लगाया, वहीं सरकार ने मौजूदा ‘गैंगस्टरवाद’ संकट की जड़ का कारण पिछले डेढ़ दशक में पिछली सरकारों के गलत शासन और राजनीतिक संरक्षण को बताया। क्रिमिनल नैटवर्क की राजनीतिक पकड़, जो लोकल सत्ता संघर्ष और गहरी क्रिमिनल-पॉलिटिकल सांठगांठ से जुड़ी हुई है, हाल के लोकल बॉडी चुनावों में भी साफ दिखी। 


मौजूदा हाइब्रिड खतरा, जो ट्रांसनैशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, नारकोटिक्स नैटवर्क और एक्सट्रीमिस्ट एक्टर्स के मिलने से पैदा हुआ है, ने पंजाब में जन सुरक्षा को कमजोर कर दिया है। लगातार पुलिस ऑप्रेशन के बावजूद, बार-बार दिन-दिहाड़े टारगेटेड किलिंग से पता चलता है कि इंटैलीजैंस, प्रिवैंटिव पुलिसिंग और रोकथाम में लगातार कमी है। (लेखक-रिसर्च एसोसिएट, इंस्टिच्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमैंट)-निजीश एन

पंजाब में गैंगस्टरों का उदय पंजाब में गैंगस्टरों का उदय Reviewed by SBR on January 13, 2026 Rating: 5

हिमाचल के अर्की में भीषण अग्निकांड, एक के बाद एक कई धमाके, बच्चे की मौत, 8-9 लोगों के मलबे में दबने की आशंका

January 12, 2026

 Himachal Arki Cylinder Blast Fire: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की में भीषण अग्निकांड सामने आय़ा है. यहां पर अर्की के निचले बाजार में बीती रात को आग लग गई. इस दौरान करीब 15 घर जलकर राख हो गए हैं और एक बच्चे की भी जिंदा जलने से मौत हो गई है. फिलहाल, आशंका जताई जा रही है कि 8-9 लोग लापता हैं.



सोलन. हिमाचल प्रदेश के सोलन जिसें में भीषण अग्निकांड हुआ है. यहां पर कई सिलेंडर फटने से अर्की के निचले बाजार में आग लगी है. अब तक एक सात साल के बच्चे की जिंदा जलने से मौत हो गई है, जबकि 8-9 लोग लापता बताए जा रहे हैं. सात साल के बच्चे का शव बरामद कर लिया गया है. फिलहाल, राहत और बचाव का काम चल रहा है. अस्पतालों को भी अलर्ट भेजा गया है.

अर्की से कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी ने बताया कि रात को दो-ढाई बजे के करीब यह आग लगी थी औऱ अब तक एक बच्चे की मौत हुई है. बिहार का यह प्रवासी बच्चा है. मौके पर एसडीआरफ की टीमों को भी बुलाया गया है.

जानकारी के अनुसार, अर्की के निचले मेन बाजार में बीती रात को आग लग गई. चंद ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और एक के बाद एक कई दुकानें धू-धू कर जलकर राख हो गईं. आगजनी के बीच कई सिलेंडर भी फटे और बाजार में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन और दमकल विभाग को सूचना दी. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की जद्दोजहद शुरू कर दी, लेकिन लगातार हो रहे ब्लास्ट के चलते दमकल कर्मियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.  इस भीषण अग्निकांड में करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान की आशंका जताई जा रही है.




अब तक की चर्चाओं और मिली जानकारी के अनुसार, बाजार में एक घर में एक नेपाली मूल का परिवार रात को कमरे में जलती अंगीठी के साथ सोया था और यहीं से आग लगी. हालांकि, जांच के बाद ही असली कारणों का पता चल पाएगा. अर्की से विधायक संजय अस्वस्थी ने बताया कि आग पर तो काबू पा लिया गया है. उन्होंने बताया कि 15 मकान जलकर राख हो गए हैं.

हिमाचल के अर्की में भीषण अग्निकांड, एक के बाद एक कई धमाके, बच्चे की मौत, 8-9 लोगों के मलबे में दबने की आशंका हिमाचल के अर्की में भीषण अग्निकांड, एक के बाद एक कई धमाके, बच्चे की मौत, 8-9 लोगों के मलबे में दबने की आशंका Reviewed by SBR on January 12, 2026 Rating: 5

बिलासपुर की गोबिंद सागर झील में गूंजेगी ड्रैगन बोट की दहाड़

January 11, 2026

 


गोबिंद सागर एडवेंचर एंड वॉटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन एवं हिमाचल ड्रैगन बोट हिमाचल प्रदेश एंड ट्रेडीशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में मंडी भराड़ी फोरलेन पुल के पास गोविंद सागर झील में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविंद सागर एडवेंचर एंड वॉटर स्पोट्र्स एसोसिएशन के प्रधान सराज अख्तर एवं ड्रैगन बोट हिमाचल प्रदेश एंड ट्रेडीशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार कसाना और रितेश अहलूवालिया द्वारा की गई। जबकि बतौर मुख्य अतिथि ड्रैगन बोट हिमाचल प्रदेश एंड ट्रेडिशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं टूरिज्म कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक डॉ. राजीव कुमार ने शिरकत की। इस अवसर पर विशेष रूप से अटल बिहारी वाजपेई पर्वतारोहण खेल संस्थान मनाली से सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर रेलू राम ठाकुर मौजूद रहे। हिमाचली परंपरा अनुसार गोविंद सागर एडवेंचर एंड वॉटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के प्रधान सराज अख्तर एवं ग्राम पंचायत नौणी के प्रधान निर्मला राजपूत एवं ड्रैगन बोट हिमाचल प्रदेश एंड ट्रेडीशनल स्पोट्र्स एसोसिएशन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार कसाना एवं रितेश अहलूवालिया ने मुख्य अतिथि डाक्टर डा. राजीव कुमार एवं विशेष अतिथि रेलु राम ठाकुर को हिमाचली टोपी हिमाचली शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।


इस मौके पर खिलाडिय़ों को गोविंद सागर झील में निशुल्क ड्रैगन बोट का प्रशिक्षण देने हेतु मुख्य अतिथि डा. राजीव कुमार द्वारा ड्रैगन बोट का विधिवत उद्घाटन किया गया। इसमें भारत देश की लगभग 28 राज्यों के साथ-साथ बीएसएफ और रेलवे व आर्मी इत्यादि की भी टीमें भाग लेंगी। इसमें लगभग 600 पुरुष एवं महिला खिलाड़ी भाग लेंगे। गोविंद सागर एडवेंचर एंड वॉटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन और हिमाचल गोविंद सागर वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी के तहत खिलाडिय़ों को ड्रैगन बोट का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। टूरिज्म कारपोरेशन के एमडी डा. राजीव कुमार ने कहा कि एसोसिएशन प्रधान सराज अख्तर, कोषाध्यक्ष निर्मला राजपूत, टेक्निकल डायरेक्टर इशान अख्तर एवं हेम राज ठाकुर इत्यादि के प्रयास बहुत ही सराहनीय हैं। इस मौके पर इंजीनियर पंडित सत्यदेव शर्मा, शालिनी शर्मा, दीक्षा शर्मा, कृष्ण कुमार कसाना, गरिमा ठाकुर, ज्योति ठाकुर, ईशानी ठाकुर एवं दौलत राम धीमान, संतोष कुमार, पंकज एवं हरीश इत्यादि के इलावा हिमाचल के विभिन्न जिलों के वॉटर स्पोट्र्स खिलाड़ी मौजूद रहे।

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US Air Strike Syria: अमरीका ने सीरिया में IS के ठिकानों पर की बमबारी, सैनिकों की हत्या का लिया बदला

January 11, 2026

 


अमरीका ने सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। अमरीकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को यह जानकारी दी। कमांड ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज, दोपहर लगभग 12:30 बजे अमरीकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने सहयोगी सेनाओं के साथ मिलकर पूरे सीरिया में आईएस के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए।”


कमांड ने कहा कि ये हमले ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक का हिस्सा थे, जिसे 13 दिसंबर को सीरिया के पल्मायरा में अमरीका और सीरियाई सेनाओं पर हुए जानलेवा आईएस हमले के जवाब में 19 दिसंबर को शुरू किया गया था। हमले में आईएस के एक आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो अमरीकी सैनिक और एक अमरीकी दुभाषिया नागरिक मारे गए।


कमांड ने कहा कि ये हमले “हमारे लड़ाकों के खिलाफ इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करने, भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने और इस इलाके में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं की रक्षा करने के हमारे लगातार प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं,” उन्होंने कहा कि अमरीकी और गठबंधन सेनाएं “अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले आतंकवादियों का पीछा करने के लिए दृढ़ हैं।”

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फैक्टरी ने जहरीला कर दिया पानी, तीन पंचायतें संकट में

January 09, 2026


 जिला सोलन की सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित एक बिरोजा फैक्टरी व शिक्षण संस्थान की गतिविधियों के चलते शूलिनी खड्ड का पानी दूषित होने की बात सामने आई है, जिससे आसपास के इलाकों में जल गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है इन संस्थानों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के कारण खड्ड का पानी प्रदूषित हुआ है, जिससे जिला सिरमौर की दो प्रमुख पेयजल योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। इसके चलते पंच्छाद विधानसभा क्षेत्र की शीनाघाट, डिलमन और कोटला पंजौल पंचायतों में पिछले 20 से 25 दिनों से लगभग 15 हजार लोग भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। वीरवार को पेयजल समस्या को लेकर तीनों पंचायतों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा से मिला व उन्हें ग्रामीणों की स्थिति से अवगत करवाया कि दूषित पानी के कारण जल शक्ति विभाग द्वारा लिए गए सैंपल फेल हो गए हैं, जिसके चलते विभाग ने दोनों पेयजल योजनाओं से पानी की आपूर्ति रोक दी है। इससे न केवल लोगों के पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है, बल्कि पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करना कठिन हो गया है। बारिश न होने के कारण हालात दिन-व-दिन और गंभीर होते जा रहे हैं।


डीसी के बोल

उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम सोलन की अध्यक्षता में चार सदस्यीयमेटी गठित कर दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में यदि आरोप सही पाए गए तो उनके के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


रासायनिक अपशिष्ट से संकट

शीनाघाट पंचायत की प्रतिनिधि सुषीता ने बताया कि उनकी पंचायत बिरोजा फैक्टरी से सटी हुई है और वहीं से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट खड्ड में मिल रहा है। इसके कारण पंचायत की सभी पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।


25 दिन से परेशान

कोटला पंजौल पंचायत के प्रधान हेमराज कश्यप ने बताया कि उनकी पंचायत के लोग पिछले 25 दिन से पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिरोजा फैक्ट्री और निजी शिक्षण संस्थान से निकलने वाला दूषित पानी सीधे शूलिनी खड्ड में डाला जा रहा है, जिससे खड्ड का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और दो पेयजल योजनाएं बंद करनी पड़ीहैं।


मजबूरन पहुंचे उपायुक्त के पास

डिलमन पंचायत के उपप्रधान दुर्गेश शर्मा ने कहा कि दूषित पानी के कारण तीनों पंचायतों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन अब तक कार्रवाई केवल पानी के सैंपल लेने तक ही सीमित रही है। इसी वजह से मजबूर होकर ग्रामीणों को उपायुक्त सोलन के पास आना पड़ा।

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अंतरराज्यीय चिट्टा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़

January 09, 2026

 


नववर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही जिला सोलन पुलिस ने नशे के खिलाफ अपने जीरो टॉलरेंस अभियान को और धार देते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। नशा तस्करी के विरुद्ध सप्लाई साइड और डिमांड साइड दोनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई करते हुए सोलन पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय चिट्टा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच नशा तस्करों को गिरफ्तार कर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं तथा उनके कब्जे से 100 ग्राम से अधिक चिट्टा बरामद किया। पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने सोलन में गुरुवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि मामले की शुरुआत हुई, जब एसआईयू टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर सलोगड़ा मेला ग्राउंड में चिट्टा बेचने की फिराक में खड़े दो आरोपियों जितेश उर्फ मुन्ना (28 वर्ष) और नीरज (31 वर्ष) को गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से छह ग्राम से अधिक चिट्टा बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी पहले भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रह चुके हैं।


दोनों को चार दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे मुख्य सप्लायर के बारे में पूछताछ की गई। उन्होंने बताया इसी दौरान मध्यरात्रि को पुलिस को सूचना मिली कि मुख्य सप्लायर इकबाल द्वारा दो अन्य व्यक्तियों को चिट्टा सप्लाई किया गया है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने साहिल (25 वर्ष) और करण (22 वर्ष) को 7.23 ग्राम चिट्टा सहित गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ थाना सदर सोलन में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि गहन पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से पुलिस ने इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर इकबाल उर्फ बिट्टू तक पहुंच बनाई। पुलिस ने उसे जीरकपुर, पंजाब से 87 ग्राम चिट्टा सहित गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में आरोपी को एक कुख्यात चिट्टा सप्लायर बताया गया है, जो लंबे समय से हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था।

एसपी के बोल

जिला सोलन पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि नशे के खिलाफ ऐसी सख्त और प्रभावी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी, ताकि विशेष रूप से युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालकर उन्हें सकारात्मक दिशा दी जा सके। उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी इकबाल उर्फ बिट्टू को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है, ताकि उससे गहन पूछताछ कर इस अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लिंक का पता लगाया जा सके।


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विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026: राष्ट्र निर्माण में युवाओं की निर्णायक भागीदारी का मंच

January 09, 2026

 


नई दिल्ली में 9 से 12 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहा विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2026 युवाओं को भारत के विकास एजेंडे के केंद्र में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत मंडपम में होने वाला इस संवाद का दूसरा संस्करण देशभर के उभरते युवा नेताओं, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और वैश्विक प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाएगा।


केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल तथा श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विकसित भारत@2047 के विज़न को साकार करने में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव से प्रेरित यह संवाद युवाओं के विचारों, नवाचार और समाधान-उन्मुख सोच को नीति निर्माण से जोड़ने का प्रयास है।


 


प्रधानमंत्री मोदी करेंगे युवाओं से संवाद


संवाद का सबसे अहम आकर्षण 12 जनवरी, राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी होगी। वे युवा प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करेंगे और राष्ट्र निर्माण में युवा नेतृत्व की भूमिका पर मार्गदर्शन देंगे। टाउनहॉल शैली में होने वाली यह बातचीत युवाओं को अपने विचार देश के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखने का अवसर देगी।

50 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी

वीबीवाईएलडी 2026 का मुख्य आधार विकसित भारत चैलेंज ट्रैक है, जो चार चरणों की प्रक्रिया से गुज़रा है। डिजिटल क्विज़ से लेकर निबंध और राज्य-स्तरीय विज़न डेक चैलेंज तक, इस पहल में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 50.42 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इनमें से चयनित 1,500 युवा नेता ग्रैंड फिनाले में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।


दस राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले विषय

संवाद के दौरान युवा नेता दस प्रमुख विषयों पर अपने विचार और समाधान प्रस्तुत करेंगे, जिनमें लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका, महिला-नेतृत्व वाला विकास, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, आत्मनिर्भर भारत, सतत और हरित विकास, स्मार्ट कृषि, सांस्कृतिक कूटनीति और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।


संस्कृति, नवाचार और वैश्विक सहभागिता


कार्यक्रम में सांस्कृतिक और डिज़ाइन ट्रैक भी शामिल हैं, जिनमें भाषण, कहानी लेखन, पेंटिंग, लोक संगीत, नृत्य और नवाचार प्रतियोगिताएं होंगी। इसके साथ ही “डिज़ाइन फॉर भारत”, “टेक फॉर विकसित भारत – हैक फॉर ए सोशल कॉज़” जैसे नए वर्टिकल्स और नो इंडिया प्रोग्राम व बिम्सटेक देशों के युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी संवाद को वैश्विक आयाम देगी।


दिन-वार प्रमुख कार्यक्रम


9 जनवरी: ओरिएंटेशन सत्र, माय भारत स्वयंसेवकों का सम्मान और संवाद के विज़न की रूपरेखा।

10 जनवरी: केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपस्थिति में उद्घाटन सत्र, विषय-आधारित चर्चाएं और विकसित भारत प्रदर्शनी।

11 जनवरी: इसरो अंतरिक्ष यात्रियों से संवाद, “कलर्स ऑफ विकसित भारत” सांस्कृतिक संध्या और प्रेरक प्रस्तुतियां।

12 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संवाद और उच्च-प्रभाव वाली युवा प्रस्तुतियां।


विकसित भारत@2047 की ओर युवा कदम


करीब 3,000 प्रतिभागियों की भागीदारी वाला यह संवाद विचारों, अनुभवों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जीवंत राष्ट्रीय इकोसिस्टम तैयार करेगा। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 न केवल युवाओं को नीति निर्माण से जोड़ता है, बल्कि उन्हें विकसित भारत@2047 की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाकर भारत के भविष्य को आकार देने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026: राष्ट्र निर्माण में युवाओं की निर्णायक भागीदारी का मंच विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026: राष्ट्र निर्माण में युवाओं की निर्णायक भागीदारी का मंच Reviewed by SBR on January 09, 2026 Rating: 5

Shimla: हाईकोर्ट का राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस, उपायुक्त और वन संरक्षक क

January 09, 2026

 

हाईकोर्ट ने पौंग डैम वन्यजीव अभयारण्य और वैटलैंड के अवैध अतिक्रमणकारियों व शिकारियों के खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर दायर आवेदन में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।

हाईकोर्ट ने पौंग डैम वन्यजीव अभयारण्य और वैटलैंड के अवैध अतिक्रमणकारियों व शिकारियों के खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर दायर आवेदन में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने उपायुक्त और वन संरक्षक को आदेश दिए हैं कि वे वैटलैंड क्षेत्र पर लगाई सभी बाड़ को तुरंत प्रभाव से हटाएं। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं कि उक्त क्षेत्र में कोई फसल न उगाई जाए, क्योंकि ऐसी फसलों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक दोनों का उपयोग किया जा रहा है, जिसका वन्यजीवों पर घातक प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि वैसे भी उक्त व्यक्तियों को वैटलैंड का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है जो उनकी नहीं है और वे अतिक्रमणकारी हैं।


कोर्ट ने तदनुसार, आवश्यक कारण बताओ नोटिस जारी करके कानून के अनुसार कदम उठाने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिए हैं कि कोई भी दीवानी अदालत उक्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई निषेधाज्ञा जारी नहीं करेगा। कोर्ट ने वन विभाग को वैटलैंड्स पर खेती की सीमा दिखाने के लिए ड्रोन से तस्वीरें लेने के आदेश भी दिए हैं। आवेदन में कहा गया है कि पौंग डैम में वन्यजीव जानवरों का शिकार कुछ खाने योग्य सामग्री से लेपित विस्फोटक पदार्थों से किया गया है ताकि पक्षियों और वन्यजीवों को लुभाया जा सके। ऐसी सामग्री खाने से जिन गायों को नुक्सान हुआ है, उनकी तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। यह भी बताया गया है कि वैटलैंड की अवैध खेती की आड़ में, स्थानीय निवासी और अन्य लोग उस भूमि का उपयोग कर रहे हैं जो वन्यजीव अभ्यारण्य के लाभ के लिए है, खासकर उत्तरी गोलार्ध जैसे रूस से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए, जिनका बिना किसी रोक-टोक के शिकार किया जा रहा है। कोर्ट को बताया गया कि उपायुक्त कांगड़ा, जो वन विभाग सहित वैटलैंड क्षेत्रों के प्रभारी हैं और वन वन्यजीव संरक्षक धर्मशाला, दोनों स्तरों पर नियंत्रण की कमी है।

Shimla: हाईकोर्ट का राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस, उपायुक्त और वन संरक्षक क Shimla: हाईकोर्ट का राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस, उपायुक्त और वन संरक्षक क Reviewed by SBR on January 09, 2026 Rating: 5

हिमाचल में बजेगा चुनावी बिगुल: 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के आदेश जारी

January 09, 2026

 


हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार की 'इंतजार करो' की रणनीति पर हाईकोर्ट ने विराम लगा दिया है। पंचायत चुनावों को आगे खिसकाने की सरकार की योजना को बड़ा झटका देते हुए, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि गांव की सरकार चुनने में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला न केवल प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला है, बल्कि स्थानीय शासन की स्वायत्तता को लेकर एक बड़ा संदेश भी है।


क्या है अदालत का कड़ा आदेश?


न्यायालय ने लगातार तीन दिनों तक चली सघन दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित नहीं रखा, बल्कि सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं:


डेडलाइन तय: कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 30 अप्रैल से पहले संपन्न करा ली जाए।


मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार इन चुनावों को लगभग छह महीने के लिए स्थगित करना चाहती थी।

हिमाचल में बजेगा चुनावी बिगुल: 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के आदेश जारी हिमाचल में बजेगा चुनावी बिगुल: 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के आदेश जारी Reviewed by SBR on January 09, 2026 Rating: 5
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