स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ा कदम: भारत एआई की मदद से महामारी का पूर्वानुमान कर पहले ही जारी करेगा अलर्ट
भारत अब बीमारी फैलने का इंतज़ार नहीं करेगा। सरकार एक ऐसा नया सिस्टम तैयार कर रही है जो एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े डाटा का उपयोग करके बीमारी का अंदाज़ा पहले ही लगा सकेगा। इससे डेंगू, चिकनगुनिया, फ्लू जैसी बीमारियों के बढ़ने की चेतावनी समय रहते मिल जाएगी और इससे निपटने की तैयारी समय रहते की जा सकेगी।
एनसीडीसी निदेशक डॉ. रंजन दास ने कहा, अब भारत में बीमारी फैलने से पहले ही संकेत मिलने वाली नई प्रणाली लागू होगी
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ रंजन दास ने बताया कि देश की पुरानी प्रणाली, जिसमें बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई होती थी, वह अब बदल रही है। नई व्यवस्था में बीमारी शुरू होने से पहले ही उसका संकेत मिल जाएगा। इससे तेजी से फैसले लेने और बीमारी को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। नए मॉडल की खास बात यह है कि अलर्ट मिलते ही ज़मीन पर काम करने वाली टीमें भी तुरंत सक्रिय हो जाती हैं।
एनसीडीसी के डॉ. हिमांशु चौहान ने कहा, एआई सिस्टम रोज 13 भाषाओं में खबरें पढ़कर बीमारी की वृद्धि और खतरे को पहचानता है
वहीं एनसीडीसी के अतिरिक्त निदेशक डॉ हिमांशु चौहान ने कहा कि एआई के जरिए अभी ऐसा एक सिस्टम बना है जो इंटरनेट पर रोजाना 13 भाषाओं में लाखों खबरें और पोस्ट पढ़ता है। यह सिस्टम अपने आप पहचान लेता है कि कहां कौन-सी बीमारी में अचानक बढ़ोतरी हो रही है, किस इलाके में किस तरह का खतरा हो सकता है और किस जानकारी को अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाना है।
एआई सिस्टम ने 30 करोड़ से अधिक खबरें स्कैन कर 95,000 स्वास्थ्य घटनाओं की पहचान कर डिजिटल चौकीदार की तरह अलर्ट जारी किया
अब तक यह सिस्टम 300 मिलियन (30 करोड़) से ज्यादा ऑनलाइन खबरें स्कैन कर चुका है और 95,000 से ज्यादा स्वास्थ्य घटनाओं का पता लगा चुका है। इससे पहले इतनी बड़ी मात्रा में जानकारी को इंसानी टीम के लिए जांचना मुश्किल था। अब एआई ने यह काम लगभग 98% आसान कर दिया है। यह सिस्टम एक तरह से डिजिटल चौकीदार की तरह काम करता है और बीमारी से जुड़े असामान्य संकेतों को पकड़कर तुरंत अलर्ट जारी करता है।
सरकार भारत में डेटा-ड्रिवन, स्मार्ट और प्रीडिक्टिव पब्लिक हेल्थ सिस्टम बना रही, अब महामारी से पहले तैयारी संभव होगी
अधिकारियों ने बताया कि सरकार की कोशिश है कि भारत एक ऐसा पब्लिक हेल्थ सिस्टम बनाए जो आने वाली महामारी, जलवायु से जुड़ी बीमारियों और नए संक्रमणों का पहले से मुकाबला कर सके। डॉ रंजन दास के मुताबिक, हम पहले बीमारी फैलने का इंतजार करते थे, अब पहले से अंदाजा लगाकर तैयारी करेंगे। भारत की रोग निगरानी अब डाटा-ड्रिवन, स्मार्ट और प्रीडिक्टिव हो रही है।
डॉ. हिमांशु के अनुसार, प्रणाली पुराने और ताज़ा डेटा जोड़कर बीमारी के फैलने का पूर्वानुमान कर आउटब्रेक रोकती है
डॉ हिमांशु ने बताया कि यह एक ऐसी प्रणाली है जो पुराने और ताज़ा डेटा को जोड़कर यह अनुमान लगाती है कि भविष्य में बीमारी कहां और कब बढ़ सकती है। इसमें मौसम, जनसंख्या, माइग्रेशन, लैब रिपोर्ट, अस्पतालों के केस, पशु-पक्षी संक्रमण सबका डाटा शामिल होता है। इससे अचानक फैलने वाली बीमारियों (आउटब्रेक) को पहले ही पहचान कर काबू किया जा सकता है।
भारत ने इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस कार्यक्रम के तहत एक राष्ट्रीय मॉडल तैयार किया है, जो विभिन्न बीमारियों की निगरानी करता है
डॉ रंजन दास ने बताया कि इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस कार्यक्रम के तहत जिलों से आने वाली साप्ताहिक रिपोर्ट, अस्पतालों, लैब और निजी डॉक्टरों से डाटा और बीमारियों के क्लस्टर की पहचान होती है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, इन्फ्लुएंजा (फ्लू), टाइफाइड, मंकीपॉक्स, पानी से फैलने वाली बीमारियां (जैसे डायरिया) और कोरोना जैसी नई वेरिएंट-आधारित बीमारियों को लेकर निगरानी की जा रही है। अमेरिका में फ्लूसाइट मॉडल, यूके में मौसम आधारित फ्लू रिपोर्टिंग, सिंगापुर में डेंगू हॉटस्पॉट की रीयल-टाइम भविष्यवाणी और दक्षिण कोरिया में एआई के जरिए कोरोना निगरानी हुई है। भारत अब इन्हीं देशों की तरह एक राष्ट्रीय मॉडल बना रहा है।
Reviewed by SBR
on
December 23, 2025
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